Description
भारतीय ग्रामीण राजनीति और नौकरशाही पर तीखा व्यंग्य। शिवपालगंज गाँव के माध्यम से श्रीलाल शुक्ल ने भ्रष्टाचार, जातिवाद और सामाजिक विडंबनाओं का मार्मिक चित्रण किया है। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक है।





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